विदेशी नागरिकों को UAPA केस में कब मिल सकती है जमानत? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि UAPA के तहत आरोपी हर विदेशी नागरिक की जमानत पर स्वतः रोक नहीं है। यदि भारत में उसका शुरुआती प्रवेश कानूनी था, तो केवल वीजा समाप्त होने के बाद अवैध रूप से रुकने के आधार पर जमानत पर विशेष प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
भारत में आतंकवाद से जुड़े मामलों में विदेशी नागरिकों की जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। Supreme Court UAPA Bail Foreign Nationals मामले में अदालत ने स्पष्ट किया कि गैर-भारतीय नागरिक होने मात्र से जमानत पर रोक नहीं लग जाती। UAPA की धारा 43D(7) का विशेष प्रतिबंध तब लागू होता है, जब आरोपी विदेशी नागरिक होने के साथ भारत में अनधिकृत या अवैध तरीके से दाखिल हुआ हो। 27 अक्टूबर 2026 को जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ ने केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसने श्रीलंकाई नागरिक मोहम्मद रिफास की जमानत बहाल की थी।
Supreme Court UAPA Bail Foreign Nationals: अदालत ने क्या फैसला सुनाया?

सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या UAPA के तहत आरोपी विदेशी नागरिक को कानून की धारा 43D(7) के कारण जमानत से वंचित किया जा सकता है।अदालत ने कहा कि इस प्रावधान को लागू करने के लिए अभियोजन पक्ष को प्रथम दृष्टया यह दिखाना होगा कि संबंधित व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है और उसने भारत में अनधिकृत या अवैध तरीके से प्रवेश किया था। केवल यह तथ्य कि किसी विदेशी नागरिक का वीजा बाद में समाप्त हो गया और उसका भारत में रहना अवैध हो गया, इस विशेष प्रतिबंध को लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं है।पीठ ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ऐसा कोई पर्याप्त रिकॉर्ड पेश नहीं कर सकी, जिससे प्रथम दृष्टया यह साबित हो कि रिफास का भारत में शुरुआती प्रवेश अवैध था। इसलिए केंद्र की अपील खारिज कर दी गई और मद्रास हाईकोर्ट का दिसंबर 2023 का आदेश बरकरार रहा।
UAPA Section 43D(7): विदेशी नागरिकों की जमानत पर क्या है नियम?
गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 43D(7) विदेशी नागरिकों के लिए जमानत पर एक विशेष प्रतिबंध लगाती है। इसके तहत UAPA के तहत दंडनीय अपराध के आरोपी गैर-भारतीय नागरिक को जमानत नहीं दी जा सकती, यदि उसने भारत में अनधिकृत या अवैध तरीके से प्रवेश किया हो। हालांकि, असाधारण परिस्थितियों में अदालत लिखित कारण दर्ज करके जमानत दे सकती है।इसका अर्थ यह नहीं है कि विदेशी नागरिकों को UAPA के मामलों में सामान्य रूप से जमानत मिल जाएगी। अदालत को मामले के तथ्यों, लागू कानूनी प्रावधानों और जमानत के अन्य मानदंडों पर भी विचार करना होगा।इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआती प्रवेश और बाद में वीजा की अवधि समाप्त होने के बीच अंतर स्पष्ट किया। अदालत के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति वैध वीजा पर भारत आया था और बाद में उसका वीजा समाप्त हुआ, तो केवल इस आधार पर धारा 43D(7) का प्रतिबंध अपने आप लागू नहीं हो जाता।
मोहम्मद रिफास का मामला क्या है?
मोहम्मद रिफास उर्फ मोहम्मद रिगबास पर आरोप था कि उन्होंने धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने और सरकार के खिलाफ साजिश रचने की कोशिश की। जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत में रहने के दौरान पहचान से जुड़े दस्तावेज हासिल किए थे। ये आरोप हैं, जिन्हें अदालत में सिद्ध अपराध के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।जुलाई 2018 में ट्रायल कोर्ट ने जांच एजेंसी द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं किए जाने के कारण रिफास को वैधानिक जमानत दी थी। यह जमानत दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167(2) के तहत मिली थी, जिसे डिफॉल्ट बेल भी कहा जाता है।बाद में केंद्र ने उनकी श्रीलंकाई नागरिकता और जमानत के समय कथित तौर पर तथ्य छिपाने का हवाला देकर जमानत रद्द कराने की मांग की। ट्रायल कोर्ट ने जमानत रद्द कर दी, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने दिसंबर 2023 में उस आदेश को पलट दिया। केंद्र ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।
क्या इस फैसले से सभी विदेशी नागरिकों को जमानत मिल जाएगी?
UAPA Bail Rules 2026 से जुड़े इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि हर विदेशी नागरिक को जमानत मिल जाएगी या UAPA के कठोर प्रावधान कमजोर हो गए हैं।सुप्रीम कोर्ट ने केवल यह स्पष्ट किया है कि धारा 43D(7) के विशेष प्रतिबंध को लागू करने के लिए शुरुआती प्रवेश की कानूनी स्थिति महत्वपूर्ण है। जमानत के अन्य कानूनी मानदंड और मामले की परिस्थितियां फिर भी लागू रहेंगी। इसके अलावा, वीजा की अवधि समाप्त होने या विदेशी नागरिकता से जुड़े अलग-अलग उल्लंघनों पर विदेशी नागरिकों से संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है।इसलिए फैसला विदेशी नागरिकों के लिए जमानत का स्वतः अधिकार नहीं बनाता, बल्कि यह स्पष्ट करता है कि जमानत पर रोक लगाने वाले विशेष प्रावधान को उसकी निर्धारित शर्तों के अनुसार ही लागू किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
Supreme Court UAPA Bail Foreign Nationals मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारत में कानूनी तरीके से दाखिल हुए विदेशी नागरिक पर केवल वीजा समाप्त होने के कारण UAPA की धारा 43D(7) का विशेष जमानत प्रतिबंध अपने आप लागू नहीं होगा। मोहम्मद रिफास के मामले में अदालत ने केंद्र की अपील खारिज कर मद्रास हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा। हालांकि, यह फैसला सभी विदेशी नागरिकों को स्वतः जमानत देने का नियम नहीं है; हर मामले में कानून और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Supreme Court UAPA Bail Foreign Nationals मामले में क्या फैसला आया?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विदेशी नागरिक होने मात्र से UAPA के तहत जमानत पर स्वतः रोक नहीं लगती। धारा 43D(7) का विशेष प्रतिबंध लागू करने के लिए शुरुआती प्रवेश के अवैध या अनधिकृत होने का प्रथम दृष्टया आधार होना चाहिए।
UAPA Section 43D(7) में विदेशी नागरिकों के लिए क्या प्रावधान है?
UAPA Section 43D(7) के तहत भारत में अनधिकृत या अवैध तरीके से प्रवेश करने वाले गैर-भारतीय नागरिक को जमानत देने पर विशेष रोक है। असाधारण परिस्थितियों में अदालत लिखित कारण दर्ज करके जमानत दे सकती है।
क्या वीजा समाप्त होने के बाद Foreign Nationals Bail in India मिल सकती है?
जमानत मिलना मामले के तथ्यों और लागू कानून पर निर्भर करता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वैध प्रवेश के बाद वीजा समाप्त होने से अपने आप UAPA की धारा 43D(7) का विशेष प्रतिबंध लागू नहीं होता।
मोहम्मद रिफास को UAPA Default Bail Provision के तहत जमानत क्यों मिली थी?
जुलाई 2018 में जांच एजेंसी निर्धारित समयसीमा के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं कर सकी थी। इसलिए ट्रायल कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167(2) के तहत उन्हें वैधानिक जमानत दी थी।
क्या Supreme Court UAPA Judgment 2026 के बाद सभी विदेशी आरोपियों को जमानत मिलेगी?
इस फैसले से सभी विदेशी आरोपियों को स्वतः जमानत नहीं मिलती। अदालत को शुरुआती प्रवेश की स्थिति के साथ जमानत से जुड़े अन्य कानूनी मानदंडों और मामले के तथ्यों पर भी विचार करना होगा।