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एसिड हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से पूछा - नियम हैं तो अपराध क्यों नहीं रुक रहे?

देश में एसिड हमलों की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि केवल दिशा-निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं, उनका पालन भी सुनिश्चित करना होगा। अब केंद्र को एसिड की बिक्री पर नियंत्रण के लिए जरूरी कदमों का हलफनामा देना होगा।

एसिड हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से पूछा - नियम हैं तो अपराध क्यों नहीं रुक रहे?

देश में एसिड हमलों को रोकने के लिए बनाए गए नियमों के बावजूद ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। इसी पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार से जवाब मांगा। Supreme Court Acid Sale Rules 2026 से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सिर्फ संवेदनशील भाषा में सर्कुलर जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। केंद्र को यह सुनिश्चित करना होगा कि राज्य सरकारें एसिड की खुदरा बिक्री को नियंत्रित करने वाले दिशा-निर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू करें। अदालत ने केंद्र से एसिड के दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी उपायों का विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा।

Supreme Court Acid Sale Rules 2026: अदालत ने केंद्र सरकार से क्या कहा?

The court noted that despite its 2013 and 2015 directions, acid continued to be freely available.Credit: PTI
The court noted that despite its 2013 and 2015 directions, acid continued to be freely available.Credit: PTI

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि एसिड की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए पहले से दिशा-निर्देश मौजूद हैं, फिर भी हमले हो रहे हैं। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करना जरूरी है।अदालत ने सवाल उठाया कि केंद्र ने उन राज्यों से जवाब क्यों नहीं मांगा, जहां नियमों के बावजूद एसिड हमले हो रहे हैं। पीठ के मुताबिक, केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और नियम लागू कराने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक डेव ने बताया कि एसिड की खुदरा बिक्री नियंत्रित करने के दिशा-निर्देश राज्यों को भेजे गए थे और राज्यों ने नियम भी बनाए हैं। हालांकि, उनका पालन कमजोर बना हुआ है। अदालत ने केंद्र से इस स्थिति को सुधारने के लिए ठोस कदम बताने को कहा।

भारत में Acid Sale Regulation India के तहत क्या नियम हैं?

एसिड की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 2013 में दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनका उद्देश्य एसिड की आसान उपलब्धता पर रोक लगाना और इसके दुरुपयोग से होने वाले हमलों को रोकना है। नियमों के तहत खुदरा बिक्री पर कई शर्तें लागू होती हैं।प्रमुख नियम इस प्रकार हैं:

पहचान पत्र जरूरी: खरीददार को सरकार द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र दिखाना होता है, जिसमें उसका पता दर्ज हो।

खरीद का कारण बताना होगा: विक्रेता को यह दर्ज करना होता है कि एसिड किस उद्देश्य से खरीदा जा रहा है।

बिक्री का रिकॉर्ड: विक्रेता को खरीददार का विवरण, पता और खरीदी गई मात्रा रजिस्टर में दर्ज करनी होती है।

नाबालिगों को बिक्री नहीं: 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को एसिड नहीं बेचा जा सकता।

स्टॉक की जानकारी: विक्रेताओं को अपने एसिड के भंडार की जानकारी संबंधित उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) को देनी होती है।

इन दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना राज्य सरकारों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट की चिंता यही है कि नियम मौजूद होने के बावजूद उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा।

क्या एसिड की खुदरा बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगेगा?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से एसिड की खुली खुदरा बिक्री पर मौजूदा नीति की समीक्षा करने को कहा है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब कई घरेलू कामों के लिए दूसरे विकल्प उपलब्ध हैं, तो एसिड को खुले बाजार में बेचने की जरूरत क्यों है।अदालत के सामने यह विकल्प भी है कि खुदरा बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए या इसे बेहद सख्त शर्तों के तहत सीमित किया जाए। हालांकि, औद्योगिक और अन्य वैध जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किसी भी नई व्यवस्था में आवश्यक उपयोग और दुरुपयोग के बीच अंतर करना होगा। केंद्र को अपने हलफनामे में उन उपायों की जानकारी देनी है, जिनसे एसिड की अवैध बिक्री और हमलों में इसके इस्तेमाल को रोका जा सके। फिलहाल सुनवाई में बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

Shaheen Malik Case: एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास पर भी जोर

यह मामला एसिड अटैक सर्वाइवर शाहीन मलिक की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में एसिड हमले के पीड़ितों को दिव्यांग व्यक्तियों की श्रेणी में शामिल करने की मांग की गई है, ताकि वे संबंधित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले सकें। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी एसिड हमलों को गंभीर और चिंताजनक बताते हुए पीड़ितों के इलाज, मुआवजे और पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है। अदालत के सामने केवल एसिड की बिक्री रोकने का मुद्दा ही नहीं, बल्कि हमले के बाद पीड़ितों को समय पर इलाज, आर्थिक सहायता और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराने की चुनौती भी है।

निष्कर्ष

Supreme Court Acid Sale Rules 2026 से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट का संदेश स्पष्ट है कि एसिड हमलों को रोकने के लिए केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है। केंद्र और राज्यों को मिलकर बिक्री पर नियंत्रण, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। अदालत की समीक्षा के बाद एसिड की खुदरा बिक्री को लेकर और सख्त व्यवस्था सामने आ सकती है। साथ ही, पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास को भी प्राथमिकता देनी होगी।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Supreme Court Acid Attack Case में अदालत ने केंद्र को क्या निर्देश दिए हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से एसिड के दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी उपायों का विस्तृत हलफनामा दाखिल करने और राज्यों के साथ समन्वय बेहतर बनाने को कहा है।

Acid Sale Guidelines India के तहत एसिड खरीदने के लिए कौन-से नियम लागू हैं?

खरीददार को वैध फोटो पहचान पत्र और खरीद का उद्देश्य बताना होता है। विक्रेता को बिक्री का रिकॉर्ड रखना होता है और 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को एसिड बेचना प्रतिबंधित है।

क्या Supreme Court Acid Ban Latest News का मतलब है कि एसिड की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लग गया है?

अदालत ने मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने और खुदरा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध या कड़े नियंत्रण की संभावना पर विचार करने को कहा है। पूर्ण प्रतिबंध लगाने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

Acid Attack Prevention India में केंद्र और राज्यों की क्या जिम्मेदारी है?

केंद्र दिशा-निर्देश और मॉडल नियम तैयार करता है, जबकि राज्यों और संबंधित अधिकारियों को बिक्री नियंत्रित करने, नियमों का पालन कराने और उल्लंघन पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होती है।

Acid Attack Victim Protection और पुनर्वास के लिए क्या कदम जरूरी हैं?

पीड़ितों को समय पर चिकित्सा, पुनर्निर्माण सर्जरी, मुआवजा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और पुनर्वास की सुविधाएं मिलनी चाहिए। शाहीन मलिक की याचिका में पीड़ितों को दिव्यांग व्यक्तियों की श्रेणी में शामिल करने की मांग भी की गई है।

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