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Russia Africa Military Recruitment : रूस-यूक्रेन युद्ध में अफ्रीकी सैनिकों की भर्ती तेज, क्या सैनिकों की कमी से जूझ रहे हैं पुतिन?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने यूक्रेन युद्ध के लिए अफ्रीकी देशों से सैनिकों की भर्ती बढ़ाई है। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच बुुरुंडी के 699 और जिम्बाब्वे के 530 नागरिकों ने रूसी सेना से अनुबंध किए। कुछ सरकारों और परिवारों ने आरोप लगाया कि लोगों को नागरिक नौकरियों का झांसा देकर भर्ती किया गया। रूस ने आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।

Russia Africa Military Recruitment : रूस-यूक्रेन युद्ध में अफ्रीकी सैनिकों की भर्ती तेज, क्या सैनिकों की कमी से जूझ रहे हैं पुतिन?

Russia Africa Military Recruitment : रूस ने यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए अफ्रीकी देशों से सैनिकों की भर्ती तेज कर दी है। ब्लूमबर्ग की 26 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेनी खुफिया जानकारी पर आधारित एक दस्तावेज में दावा किया गया है कि रूस अब उन देशों में ज्यादा भर्ती कर रहा है, जहां गरीबी और कमजोर संस्थागत व्यवस्था के कारण लोगों को आकर्षित करना आसान हो सकता है। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच बुुरुंडी के 699 और जिम्बाब्वे के 530 नागरिकों ने रूसी रक्षा मंत्रालय के साथ सैन्य अनुबंध किए। यूक्रेनी पक्ष का आकलन है कि इस अभियान का मकसद युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई करना और रूसी सेना में सैनिकों की कमी दूर करना है।

बुुरुंडी और जिम्बाब्वे से भर्ती में कई गुना बढ़ोतरी

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, यूक्रेनी खुफिया जानकारी से जुड़े दस्तावेज में बताया गया है कि रूस ने जनवरी से सितंबर 2026 के बीच बुुरुंडी के 699 नागरिकों को सेना में भर्ती किया। 2025 के पूरे साल में यह संख्या सिर्फ 30 थी। इसी तरह जिम्बाब्वे से भर्ती होने वालों की संख्या 2025 के 65 से बढ़कर 530 हो गई।

सांकेतिक तस्वीर - मेडागास्कर में सैन्य प्रशिक्षण के दौरान, 'रशियन अफ्रीका कॉर्प्स' का एक प्रशिक्षक मेडागास्कर के एक सैनिक से हाथ मिलाता है।
सांकेतिक तस्वीर - मेडागास्कर में सैन्य प्रशिक्षण के दौरान, 'रशियन अफ्रीका कॉर्प्स' का एक प्रशिक्षक मेडागास्कर के एक सैनिक से हाथ मिलाता है।

दोनों देशों से मिलाकर 2026 के शुरुआती नौ महीनों में 1,229 लोगों ने रूसी सेना के साथ अनुबंध किए, जबकि 2025 में यह संख्या 95 थी। यानी केवल इन दो देशों से भर्ती में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।दस्तावेज में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, सिएरा लियोन, सूडान और कैमरून में भी भर्ती बढ़ने की बात कही गई है। मेडागास्कर भी नए भर्ती स्रोतों में शामिल हुआ है। वहां के सैन्य अधिकारियों और रूस के बीच हाल के महीनों में सहयोग बढ़ने की जानकारी सामने आई है।

केन्या और दक्षिण अफ्रीका के विरोध के बाद बदली रणनीति

रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने उन देशों में सैन्य भर्ती घटाई या लगभग रोक दी है, जहां स्थानीय सरकारों ने अपने नागरिकों को यूक्रेन युद्ध में शामिल होने से रोकने की कोशिश की। इनमें केन्या और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश शामिल हैं। इसके बाद रूस ने बुुरुंडी, जिम्बाब्वे और सिएरा लियोन समेत दूसरे देशों में भर्ती पर जोर बढ़ाया।यूक्रेनी खुफिया आकलन के मुताबिक, कम आय वाले देशों और कमजोर लोकतांत्रिक संस्थाओं वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना इस रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, ये निष्कर्ष यूक्रेनी खुफिया जानकारी पर आधारित हैं और रूस ने इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।

नौकरी का वादा कर सेना में भर्ती करने के आरोप

अफ्रीकी देशों की सरकारों और प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया है कि कुछ भर्ती नेटवर्क लोगों को रूस में अच्छी तनख्वाह वाली नागरिक नौकरियों का लालच देते हैं। उन्हें ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड, रसोइया या अन्य काम करने का प्रस्ताव दिया जाता है, लेकिन रूस पहुंचने के बाद कुछ लोगों को सेना में शामिल कर यूक्रेन के मोर्चे पर भेजे जाने की शिकायतें सामने आई हैं।भर्ती करने वाले कथित तौर पर बड़े साइनिंग बोनस, अच्छी मासिक तनख्वाह और रूसी नागरिकता मिलने की संभावना का भी वादा करते हैं। द इनसाइडर की पिछली जांच में सोशल मीडिया और टेलीग्राम पर ऐसे विज्ञापनों और भर्ती संपर्कों का पता लगाने की बात कही गई थी। एक विज्ञापन में विदेशी नागरिकों को अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के बदले 31 लाख रूबल तक का बोनस और हर महीने 2.60 लाख रूबल वेतन देने का दावा किया गया था। ये विज्ञापनों में किए गए कथित प्रस्ताव थे, सभी भर्ती होने वालों को मिली वास्तविक रकम नहीं।
26 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र की यूक्रेन संबंधी स्वतंत्र जांच आयोग ने भी विदेशी नागरिकों को कथित तौर पर धोखे या दबाव के जरिए रूसी सेना में शामिल किए जाने के मामलों पर चिंता जताई। आयोग के मुताबिक, कुछ लोगों को नागरिक नौकरियों का भरोसा देकर रूस बुलाया गया और वहां पहुंचने के बाद उनसे सैन्य अनुबंधों पर हस्ताक्षर कराए गए। आयोग ने ऐसे मामलों में भर्ती एजेंटों और मध्यस्थ नेटवर्क की भूमिका की जांच की बात कही।

केन्या और जिम्बाब्वे में कार्रवाई

केन्या की राष्ट्रीय खुफिया सेवा ने फरवरी 2026 में दावा किया था कि उसके 1,000 से ज्यादा नागरिक रूसी सेना में भर्ती हो चुके हैं। इसके बाद केन्या के विदेश मंत्री मुसालिया मूदावादी मार्च में मॉस्को गए और रूस से अपने नागरिकों की भर्ती रोकने की मांग की। केन्या सरकार के मुताबिक, बातचीत के बाद रूस ने केन्या को उन देशों की सूची में शामिल करने पर सहमति जताई, जिनके नागरिकों को सैन्य सेवा के लिए स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।केन्या अपने उन नागरिकों की वापसी की भी कोशिश कर रहा है, जो पहले ही रूसी सेना में शामिल हो चुके हैं। अक्टूबर की शुरुआत में मूदावादी ने संसद को बताया था कि अधिकारियों के पास युद्ध में शामिल 354 केन्याई नागरिकों की जानकारी है। इनमें से 84 के मारे जाने या लापता होने की आशंका है। 26 अक्टूबर को मूदावादी रूस-अफ्रीका शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फिर मॉस्को रवाना हुए। नागरिकों की भर्ती का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में अब भी बना हुआ है।
जिम्बाब्वे में भी कथित भर्ती एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। मार्च में सरकार ने यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए भर्ती किए गए अपने 15 नागरिकों की मौत की पुष्टि की थी और 66 अन्य को वापस लाने की कोशिश की बात कही थी। अधिकारियों ने कथित भर्ती नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें रूसी नागरिक भी शामिल थे। मई में रूसी नागरिक सोफिया लियोनोवा नौकरी के बहाने लोगों को भर्ती करने के आरोपों से जुड़े मामले में अदालत में पेश हुईं। जून में रूसी नागरिक लियोनिद कोफ्तेव को हरारे हवाई अड्डे पर एक जिम्बाब्वे नागरिक को रूस भेजने में कथित भूमिका के मामले में हिरासत में लिया गया था। ये मामले आरोपों और जांच से जुड़े हैं; इन्हें दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए।

यूक्रेन का दावा- 43 अफ्रीकी देशों के 5,400 से ज्यादा लोग रूसी सेना में

यूक्रेन के युद्धबंदियों से जुड़े समन्वय मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2026 तक 151 देशों और कुछ गैर-मान्यता प्राप्त क्षेत्रों के करीब 45,900 विदेशी नागरिकों ने रूसी सेना के साथ अनुबंध किए थे। इनमें 43 अफ्रीकी देशों के लगभग 5,400 लोग शामिल बताए गए हैं। यह कुल पहचाने गए विदेशी अनुबंध सैनिकों का करीब 12% है।यूक्रेनी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच रूस ने 16,200 विदेशी नागरिकों को सेना में भर्ती किया, जो 2025 के पूरे साल में दर्ज करीब 16,000 से अधिक है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ये रूसी सेना के साथ अनुबंध करने वाले पहचाने गए लोगों की संख्या बताते हैं, न कि यह कि सभी अभी सक्रिय रूप से युद्ध लड़ रहे हैं।
रूस अवैध भर्ती के आरोपों से इनकार करता रहा है। केन्या में रूसी दूतावास ने पहले कहा था कि विदेशी नागरिक स्वेच्छा से रूसी सशस्त्र बलों में शामिल हो सकते हैं। क्रेमलिन ने सैनिकों की कमी और नई व्यापक लामबंदी की जरूरत के दावों को भी खारिज किया है। ऐसे में भर्ती के पैमाने, नागरिक नौकरियों के नाम पर लोगों को बुलाने और उन्हें युद्ध में भेजने के आरोपों को लेकर रूस और यूक्रेन के दावों में स्पष्ट अंतर बना हुआ है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Russia अफ्रीकी देशों से अपनी सेना में भर्ती क्यों बढ़ा रहा है?

यूक्रेनी खुफिया जानकारी पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक, रूस यूक्रेन युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और सैनिकों की कमी दूर करने के लिए अफ्रीकी देशों से भर्ती बढ़ा रहा है। रूस ने इस आकलन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।

Russia Africa Military Recruitment की रिपोर्ट में किन देशों का जिक्र है?

रिपोर्ट में बुुरुंडी, जिम्बाब्वे, सिएरा लियोन, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, सूडान, कैमरून और मेडागास्कर का जिक्र है। इसके अलावा केन्या और दक्षिण अफ्रीका में भर्ती रोकने की कोशिशों का भी उल्लेख किया गया है।

रूस की सेना में Burundi और Zimbabwe से कितने लोगों की भर्ती होने की रिपोर्ट है?

रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच बुुरुंडी के 699 और जिम्बाब्वे के 530 नागरिकों ने रूसी रक्षा मंत्रालय के साथ सैन्य अनुबंध किए। 2025 में पूरे साल ये आंकड़े क्रमशः 30 और 65 थे।

Russia Ukraine War में African Recruits की क्या भूमिका है?

रिपोर्टों के मुताबिक, अफ्रीकी देशों से भर्ती किए गए कुछ लोग रूसी सेना के साथ यूक्रेन युद्ध में शामिल हुए हैं। हालांकि, सभी भर्ती किए गए लोगों की तैनाती या मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

क्या अफ्रीकी नागरिकों को रूस में नौकरी का झांसा देकर सेना में भर्ती किया जा रहा है?

कुछ अफ्रीकी सरकारों और परिवारों ने आरोप लगाया है कि लोगों को ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड और अन्य नागरिक नौकरियों का वादा करके रूस बुलाया गया, लेकिन बाद में उन्हें सैन्य अनुबंध करने या युद्ध में भेजे जाने का सामना करना पड़ा। संयुक्त राष्ट्र की जांच आयोग ने भी धोखे और दबाव के जरिए भर्ती किए जाने के मामलों पर चिंता जताई है।

Russia की Foreign Military Recruitment Campaign का Ukraine War पर क्या असर हो सकता है?

विदेशी नागरिकों की भर्ती से रूस को युद्ध के लिए अतिरिक्त सैनिक मिल सकते हैं और उसकी सैन्य जनशक्ति की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है। दूसरी ओर, कथित भ्रामक भर्ती से प्रभावित परिवारों, अफ्रीकी सरकारों और रूस के साथ उनके कूटनीतिक संबंधों पर दबाव बढ़ सकता है।

African Governments रूस में अपने नागरिकों की भर्ती को लेकर क्या कदम उठा रही हैं?

केन्या ने रूस से भर्ती रोकने और अपने नागरिकों की वापसी में मदद की मांग की है। जिम्बाब्वे ने कथित भर्ती एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई की है। दक्षिण अफ्रीका समेत कुछ अन्य देशों ने भी अपने नागरिकों को रूस में आकर्षक नौकरी के प्रस्तावों को लेकर सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

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