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FPI की बिकवाली के बीच LTCG और STT की समीक्षा, क्या टैक्स में मिलेगी राहत ?

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की भारी निकासी के बीच केंद्र सरकार LTCG और STT की समीक्षा कर रही है। निवेशकों और टैक्स विशेषज्ञों से सुझाव लिए जा रहे हैं, लेकिन टैक्स दरों में कटौती पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

FPI की बिकवाली के बीच LTCG और STT की समीक्षा, क्या टैक्स में मिलेगी राहत ?

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार निकासी के बीच केंद्र सरकार ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की समीक्षा शुरू की है। द इकोनॉमिक टाइम्स की 27 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार निवेशकों, बाजार से जुड़े लोगों और टैक्स विशेषज्ञों से इस टैक्स व्यवस्था पर सुझाव ले रही है।

इस समीक्षा का मकसद यह समझना है कि मौजूदा टैक्स नियम भारतीय शेयर बाजार में निवेश की लागत और उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा को किस तरह प्रभावित करते हैं। हालांकि, सरकार ने अभी तक LTCG या STT की दरों में कटौती की घोषणा नहीं की है।

2026 में FPI ने कितनी बिकवाली की?

रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में उस समय तक भारतीय शेयरों से ₹48,056 करोड़ निकाले थे। इसके साथ ही 2026 में उनकी कुल निकासी बढ़कर लगभग ₹3.08 लाख करोड़ हो गई थी। तुलना के लिए, पूरे 2025 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब ₹1.66 लाख करोड़ निकाले थे।

यह आंकड़ा 25 अक्टूबर तक की स्थिति दर्शाता है, पूरे अक्टूबर का अंतिम आंकड़ा नहीं। भारी निकासी से बाजार में विदेशी पूंजी के प्रवाह को लेकर चिंता बढ़ी है।

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FPI भारतीय शेयर बाजार से पैसा क्यों निकाल रहे हैं ?

विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे कई वजहें बताई गई हैं। द इकोनॉमिक टाइम्स की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, मध्य पूर्व में तनाव, महंगाई की चिंताओं और कंपनियों के कमजोर कमाई अनुमानों को प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।

इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में निवेश के दूसरे अवसर और रुपये में उतार-चढ़ाव भी विदेशी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए FPI की बिकवाली को केवल LTCG या STT टैक्स से जोड़ना सही नहीं होगा।

सरकार LTCG और STT की समीक्षा क्यों कर रही है?

सरकार यह समझना चाहती है कि भारतीय शेयर बाजार पर लागू टैक्स व्यवस्था निवेशकों के फैसलों को किस हद तक प्रभावित करती है। बाजार में होने वाले लेनदेन पर STT और निवेश से हुए पात्र मुनाफे पर LTCG टैक्स लागू होता है। इन दोनों की समीक्षा से यह आकलन किया जा सकता है कि मौजूदा नियम निवेश की लागत और बाजार की प्रतिस्पर्धा पर क्या असर डालते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा हो रही थी, लेकिन किसी फैसले या समयसीमा को अंतिम रूप नहीं दिया गया था।

LTCG टैक्स क्या है और इसकी मौजूदा दर कितनी है?

LTCG यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स, निवेश को निर्धारित अवधि तक रखने के बाद बेचने पर हुए पात्र दीर्घकालिक मुनाफे पर लगाया जाता है।

आयकर विभाग के मुताबिक, धारा 112A के अंतर्गत आने वाले पात्र सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों, इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड की यूनिट और कुछ अन्य निर्दिष्ट निवेशों से एक वित्त वर्ष में हुए ₹1.25 लाख से अधिक के दीर्घकालिक लाभ पर 12.5% टैक्स लागू है। यह दर 23 जुलाई 2024 से किए गए संबंधित हस्तांतरणों पर लागू है।

यदि इस दर में कटौती होती है, तो संबंधित निवेशकों के टैक्स के बाद बचने वाले मुनाफे में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, किसी भी बदलाव का वास्तविक असर निवेश के प्रकार और लागू टैक्स नियमों पर निर्भर करेगा।

STT क्या है और इसमें कटौती का क्या असर होगा?

STT यानी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स शेयर बाजार में कुछ निर्धारित प्रतिभूतियों के लेनदेन पर लगाया जाता है। इसकी दर लेनदेन के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होती है। LTCG टैक्स के विपरीत, STT का संबंध निवेश से हुए मुनाफे के बजाय निर्धारित बाजार लेनदेन से है।

STT में कटौती होने पर संबंधित लेनदेन की लागत कम हो सकती है। दूसरी ओर, सरकार को टैक्स से मिलने वाले राजस्व पर भी विचार करना होगा। इसलिए किसी संभावित बदलाव का फैसला बाजार में निवेश की लागत, सरकारी आय और निवेशकों पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।

क्या Budget 2027 में टैक्स में राहत मिल सकती है?

केंद्रीय बजट 2027-28 में LTCG और STT से जुड़े बदलावों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन अभी यह कहना संभव नहीं है कि बजट में टैक्स कटौती की घोषणा होगी। सरकार की समीक्षा और अंतिम नीतिगत फैसले के बीच अंतर है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में समीक्षा और सुझाव लेने की बात सामने आई है। जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक किसी प्रस्तावित कटौती को तय बदलाव के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।

निष्कर्ष

FPI की भारी निकासी के बीच सरकार LTCG और STT की समीक्षा कर रही है। टैक्स में कटौती अभी तय नहीं है। आगे का फैसला सरकारी राजस्व, निवेश की लागत और बाजार की प्रतिस्पर्धा पर विचार के बाद स्पष्ट होगा।

FAQ (Frequently Asked Questions):

FPI Selling India 2026 के पीछे क्या प्रमुख कारण हैं?

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मध्य पूर्व का तनाव, महंगाई की चिंता और कंपनियों की कमाई को लेकर कमजोर अनुमान बिकवाली के प्रमुख बताए गए कारणों में शामिल हैं।

सरकार LTCG और STT की समीक्षा क्यों कर रही है?

सरकार यह आकलन करना चाहती है कि मौजूदा टैक्स व्यवस्था निवेश की लागत और भारतीय शेयर बाजार की प्रतिस्पर्धा को किस तरह प्रभावित करती है।

LTCG और STT में क्या अंतर है?

LTCG पात्र निवेश से हुए दीर्घकालिक मुनाफे पर लगता है, जबकि STT शेयर बाजार के कुछ निर्धारित लेनदेन पर लगाया जाता है।

LTCG टैक्स घटने से निवेशकों को क्या फायदा हो सकता है?

यदि संबंधित LTCG दर घटती है, तो पात्र निवेशकों के मुनाफे पर टैक्स कम हो सकता है। वास्तविक लाभ लागू नियमों और निवेश की स्थिति पर निर्भर करेगा।

क्या Budget 2027 में LTCG और STT की दरें घटना तय है?

नहीं। अभी समीक्षा और सुझाव लेने की खबरें हैं। टैक्स दरों में कटौती की कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

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